न्यायालय की गंभीरता और भुतहा हँसी के बीच पहले दिन दर्शकों ने हल्केपन को चुना। किंतु असली परीक्षा अभी शेष है।

त्योहारों का मौसम हिंदी सिनेमा के लिए सदा से बॉक्स ऑफ़िस की सबसे कठिन परीक्षा-भूमि रहा है। इस वर्ष दशहरे से ठीक पहले के शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को, सिनेमाघरों में दो ऐसी फ़िल्में एक साथ उतरीं जो विषय, स्वभाव और शिल्प, तीनों में एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव पर खड़ी हैं। एक ओर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता राजकुमार राव का न्यायालयी नाटक (कोर्टरूम ड्रामा) 'प्रहार – द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ उज्ज्वल निकम' है, जो देश के सबसे संवेदनशील आपराधिक मुक़दमों की पड़ताल करता है। दूसरी ओर यामी गौतम धर की फ़ैंटेसी हॉरर-कॉमेडी 'नई नवेली' है, जो पूरे परिवार को एक साथ हँसाने और सहमाने का वादा लेकर आई है। पहले दिन के आँकड़े बताते हैं कि इस द्वंद्व के प्रथम चरण में बाज़ी 'नई नवेली' के हाथ लगी है।

भीड़ भरे पर्दे पर दो विपरीत स्वर

यह टक्कर आरंभ से तय नहीं थी। 'प्रहार' पहले 7 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली थी; बाद में इसे स्थगित कर दशहरे की त्योहारी खिड़की में लाया गया। किंतु यह खिड़की स्वयं भीड़ से भरी है। 'दृश्यम 3', 'हनुमान अंश' और 'उड़ता तीर' जैसी फ़िल्में पहले से सिनेमाघरों में जमी हैं, जिसके कारण नई फ़िल्मों को सीमित पर्दों से ही संतोष करना पड़ा। ऐसे में दोनों फ़िल्मों के सामने चुनौती केवल एक-दूसरे से नहीं, बल्कि पूरे बाज़ार से थी। 

'प्रहार': अदालत के भीतर लड़ा गया युद्ध

'पाताल लोक' और 'थ्री ऑफ़ अस' जैसी कृतियों से पहचान बनाने वाले निर्देशक अविनाश अरुण की यह फ़िल्म दिनेश विजान की मैडॉक फ़िल्म्स की प्रस्तुति है। यह विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन तथा उनके ऐतिहासिक मुक़दमों पर आधारित है। फ़िल्म सन् 1993 के मुंबई बम-धमाकों से जुड़े मुक़दमे को छूती है, पर उसका केंद्र 26/11 के आतंकी हमले के बाद चला अजमल कसाब का मुक़दमा है। इसी न्यायिक संघर्ष की परिणति कसाब के फाँसी के तख़्ते तक पहुँचने में हुई। फ़िल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि वह मेलोड्रामा और अतिशयोक्ति से बचती है और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी, जटिल और संवेदनशील लय को पर्दे पर उतारती है। 

उज्ज्वल निकम की भूमिका में राजकुमार राव के अभिनय की व्यापक सराहना हो रही है। स्वयं निकम ने भी उनके चित्रण को प्रामाणिक बताया था। अजमल कसाब के रूप में मराठी अभिनेता ललित प्रभाकर का काम भी चर्चा में है। सहायक भूमिकाओं में वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी हैं। समीक्षकों ने फ़िल्म को पाँच में से तीन से चार सितारे दिए हैं।

'नई नवेली': मेरठ के आँगन में भय और हास्य

'नई नवेली' तमिल फ़िल्मकार बालाजी मोहन की पहली हिंदी फ़िल्म है, जिन्हें 'मारी' और 'मारी 2' के लिए जाना जाता है। आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा ने इसका निर्माण किया है। इसकी पटकथा हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है, और इसे अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ तथा कलर येलो ने प्रस्तुत किया है। 

कहानी एक आदर्श-सी दिखने वाली नववधू की है, जो मेरठ के एक अस्त-व्यस्त परिवार को स्वर्ग में बदल देती है। किंतु उसके देवर को संदेह होने लगता है कि उसकी आदर्श भाभी वास्तव में कोई डायन है। यामी गौतम ने इस नववधू, मोहिनी, की भूमिका निभाई है। कथा में निर्णायक मोड़ तब आता है जब त्रेता युग से जुड़े एक रहस्यमय पत्थर 'काल शील' के प्रभाव से उसका पति एक राक्षस में बदलने लगता है। लोक-विश्वास, पारिवारिक हास्य और अलौकिक भय के इस मिश्रण में 'स्त्री' जैसी हॉरर-कॉमेडी की परंपरा की स्पष्ट झलक मिलती है। यह वही परंपरा है जिसने पिछले कुछ वर्षों में हिंदी सिनेमा में एक स्वतंत्र विधा का रूप ले लिया है।

फ़िल्म में आदिनाथ कोठारे, मीता वशिष्ठ और सुनीता राजवार भी हैं, और संगीत जी.वी. प्रकाश कुमार ने दिया है। सिनेमाघरों के बाद फ़िल्म का डिजिटल प्रदर्शन अमेज़न प्राइम वीडियो पर होगा। 

पहले दिन का लेखा-जोखा

बॉक्स ऑफ़िस ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के प्रारंभिक आँकड़ों के अनुसार, पहले दिन की दौड़ में 'नई नवेली' ने 'प्रहार' पर स्पष्ट बढ़त बना ली है:

पैमाना (पहला दिन)'नई नवेली''प्रहार'
भारत में शुद्ध कमाई (नेट)₹3.25 करोड़₹2.35 करोड़
भारत में सकल कमाई (ग्रॉस)₹3.83 करोड़₹2.77 करोड़
विदेशी बाज़ार₹0.75 करोड़₹0.75 करोड़
विश्वव्यापी सकल कमाई₹4.58 करोड़₹3.52 करोड़

विदेशी बाज़ारों में दोनों फ़िल्में बराबरी पर रहीं। अंतर पूरी तरह घरेलू दर्शकों ने रचा, जहाँ 'नई नवेली' लगभग 90 लाख रुपये की शुद्ध बढ़त के साथ आगे निकली। यह परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित भी नहीं था। अग्रिम बुकिंग में ही 'नई नवेली' पहले दिन के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये जुटा चुकी थी, जबकि 'प्रहार' का यह आँकड़ा लगभग 97.71 लाख रुपये था। 

अनुमान और यथार्थ के बीच

पहले दिन के आँकड़ों को व्यापार-जगत की अपेक्षाओं के आलोक में देखें, तो दोनों फ़िल्मों की कहानी और स्पष्ट हो जाती है। ट्रेलर को मिली प्रतिक्रिया के आधार पर विश्लेषकों ने 'प्रहार' के लिए 5.5 से 6.5 करोड़ रुपये की ओपनिंग का अनुमान लगाया था। यह आँकड़ा इसे राजकुमार राव के करियर की पाँच सबसे बड़ी ओपनिंग में शामिल कर देता। 2.35 करोड़ रुपये की वास्तविक कमाई इस अपेक्षा से काफ़ी नीचे है। इसके विपरीत, 'नई नवेली' के लिए 3 से 3.5 करोड़ रुपये की ओपनिंग आँकी गई थी, और फ़िल्म ठीक इसी दायरे में रही। यह आँकड़ा यामी गौतम की पिछली फ़िल्म 'हक़' की 1.75 करोड़ रुपये की ओपनिंग से भी कहीं आगे है। 

इस अंतर के पीछे विधा (जॉनर) का आकर्षण स्पष्ट दिखता है। त्योहार के दिनों में पारिवारिक दर्शक हल्के-फुल्के, रोमांचक मनोरंजन की ओर सहज ही खिंचते हैं, और हॉरर-कॉमेडी इस समय हिंदी सिनेमा की सबसे भरोसेमंद व्यावसायिक विधाओं में गिनी जा रही है। इसके विपरीत, गंभीर विषय वाली फ़िल्में प्रायः धीमी शुरुआत करती हैं और अपनी यात्रा के लिए दर्शकों के मौखिक प्रचार पर निर्भर रहती हैं।

सप्ताहांत की असली परीक्षा

'प्रहार' के पक्ष में सबसे बड़ा संकेत उसके शो-दर-शो बढ़ते दर्शक हैं। शुक्रवार सुबह के शो में फ़िल्म की ऑक्यूपेंसी मात्र 5.69 प्रतिशत थी, जो रात के शो तक बढ़कर 25.85 प्रतिशत हो गई। यह उछाल बताता है कि मल्टीप्लेक्स का दर्शक फ़िल्म को स्वीकार कर रहा है। यदि यह सकारात्मक मौखिक प्रचार शनिवार और रविवार तक बना रहा, तो फ़िल्म की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। दूसरी ओर, 'नई नवेली' के लिए चुनौती अपनी शुरुआती बढ़त को टिकाए रखने की होगी, क्योंकि हॉरर-कॉमेडी की सफलता अंततः इस पर निर्भर करती है कि दर्शक सिनेमाघर से संतुष्ट होकर लौटते हैं या नहीं।

त्योहारी सप्ताहांत और दशहरे की छुट्टियाँ दोनों फ़िल्मों को बॉक्स ऑफ़िस पर अपनी पकड़ मज़बूत करने का सुनहरा अवसर देती हैं। पहले दिन की दौड़ प्रायः प्रचार और विधा के आकर्षण से तय होती है, किंतु किसी फ़िल्म का वास्तविक भाग्य सप्ताहांत के बाद लिखा जाता है। 'नई नवेली' ने आरंभ जीत लिया है। 'प्रहार' के पास अब भी वह अवसर शेष है, जो केवल दर्शकों का भरोसा ही दे सकता है।